मंगलवार, 13 नवंबर 2018

'एक सफर' बचपन का

बचपन जो बीत गया

बचपन जो बीत जाए तो वापस कहाँ आता है,
उम्र भर की बातों का बचपन से जो नाता है।
हर एक पल बचपन का आँखों में आता है,
वक्त जो बीत जाए तो बचपन ही याद आता है।
और बचपन जो बीत जाए तो वापस कहाँ आता है।।

बचपन की यादें

बचपन जितना प्यारा ये नाम है इससे भी कई गुना ज्यादा प्यारा बचपन के वो दिन होते हैं जिन्हें हम ना जाने क्यों छोड़ आते हैं। आज हम सब यही सोचते हैं कि काश हम बड़े ही ना होते, ना समय गुज़रता, ना ही ये 'सफर' होता और ना ही समझौते ।

हसना-खेलना और चिल्ला कर रोना, फिर थक-हार कर खूब सोना,
बड़ा अजब खेल है जीवन का बचपन को यूँ जवानी में खोना।
दिन बचपन के
बाल्यावस्था


बचपन के वो लम्हे

उन दिनों की याद में खो जाने में जो सुकून मिलता है
उस फूल जैसा है जो बाग में अकेला ही खिलता है।
ख्वाहिशों छोड़कर, बेफिक्र जीना बचपन कहलाता है।
उम्मीद और अपेक्षाएँ रखना बचपन को दूर भगाता है।


बचपन बहुत दूर रह गया अब रह गयी हैं यादें,
कहने को कुछ नहीं है फिर भी रह गयी बातें।
बचपन के सब दिन बीत गये ना रह गयी हैं रातें,
आओ
बाल दिवस के इस अवसर पर कर लें कुछ मुलाकातें।


बाल दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।

बच्चे, मन के सच्चे, दिल के अच्छे। 

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