सोमवार, 6 जुलाई 2020

शहर नहीं मैं गांव हूं, हर दर्द की छांव हूं।
भूखा, प्यासा या गरीबी हर बेसहारे का पाऊं हूं।
शहर नहीं मैं गांव हूं कड़ी धूप की छांव हूं।
आंधियां, तूफान या बारिश से पानी छलक उठे।
फ़र्क नहीं पड़ता क्योंकि मैं इसी गांव की नाव हूं।
शहर नहीं मैं गांव हूं और इसी गांव की छांव हूं।

शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

बिजली विभाग से अनुरोध

अल्मोड़ा, भैंसियाछाना ब्लाक में बिजली की परेशानी दिन पर दिन बढ़ते जा रही है, रोज का ये ड्रामा अब बर्दाश्त से बाहर है। *डूंगरी* गांव के ट्रांसफार्मर में हर शाम एक लम्बी लकड़ी लिए कुछ नव युवक बिजली ठीक करने में लगे रहते हैं खतरे की लकीर माथे पर खींच कर हर रोज जो  जोखिम उठाते हैं उसका जिम्मेदार कौन है। छोटे बच्चे, विद्यार्थियों, नवयुवकों के साथ साथ हर किसी के जीवन पर जो बुरा प्रभाव पड़ रहा है क्या उसके बारे में एक बार विचार करके ठीक नहीं किया जा सकता? 

एक सफर

गुरूजी को कैसे जन्मदिन की बधाई दें।

जन्मदिन की अनंत हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय गुरूजी, गुरूजी जी, आप केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक सोच, एक मार्गदर्शक और एक प्रेरणा हैं। आपके शब्दों...